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11-07-2026
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बस स्थानक में श्वानों का रहता है डेरा
श्वानों के झुंड मार्ग से अब बस स्थानक में भी डेरा डाल रहे
जिले के अनेक ग्रामों में श्वानों का आतंक देखने मिल रहा है। श्वानों के झुंड मार्ग से अब बस स्थानक में भी डेरा डाल रहे हैं। जिससे बस का इंतजार करने वाले यात्रियों को उनसे डर बना रहता है।
इसके बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। श्वानों का झुंड बस स्थानक और अन्य स्थान में होने से लोगों के मन में डर बना है। कई बार आपस में जब यह श्वान भिड़ते हैं तो और भी खतरा बढ़ जाता है। श्वानों (कुत्तों) से मुख्य खतरा रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का है, जो काटने या खरोंचने से फैलती है। इसके अलावा आक्रामक आवारा कुत्तों के झुंड बच्चों और बुजुर्गों के लिए शारीरिक रूप से बेहद खतरनाक होते हैं। आवारा कुत्तों में रेबीज का खतरा सबसे अधिक होता है। शहरों में आवारा कुत्तों की समस्या एक गंभीर मुद्दा है, इससे नागरिकों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को खतरा रहता है और अक्सर संक्रमण या काटने की घटनाएं सामने आती हैं। क्षेत्र के नागरिकों के अनुसार शहर में आवारा कुत्तों ने आतंक मचा रखा है। शहर की शायद ही कोई सड़क या गली हो जहां इनकी दहशत ना हो। मार्ग से आते-जाते समय कब श्वान किस पर हमला कर दे बताया नहीं जा सकता। इसके बावजुद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
शहर में कई स्थानों पर अक्सर आवारा कुत्तों के झुंडों को बैठे देखा जा सकता है। इसमें बस स्थानक का समावेश है। श्वानों के कारण लोग सुबह और रात में
अपने घरों से निकलने से भी कतराने लगे हैं।
आवारा कुत्तों की भरमार है जो अक्सर आने-जाने वाले लोगों पर झपट पड़ते हैं। कई बार ये लड़ते-लड़ते बीच सड़क में भी आ जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालकों का इनमें उलझकर गिरने का खतरा बना रहता है। कई बार ये लोगों की बाइक या कार के पीछे भागते हैं। झुंड में रहने वाले ये कुत्ते रात में सड़क पर आवागमन करने वाले किसी भी वाहन पर अचानक टूट पड़ते हैं। इनसे बचने के प्रयास में कई वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। इसके बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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